Allah Ibadat- "क़ुरान की नसीहतें- कुरआन एक ऐसा चराग़ है जिसका हक़ पर होना बजाए ख़ुद रोशन है!"

Allah Ibadat

Ibadat is the reason behind our existence on the face of the earth. If a student heads to a western country seeking a PhD, and has no other goal than that, we say to him: The reason behind your existence in that country is getting your PhD, and anything serving that purpose is permissible, while, on the other hand, anything distracting you from it is prohibited.


Once you know that the ultimate goal and reason behind your existence on earth is ibadat, you should choose from the data in your life and whatever is available in your environment that meets your goal, and this is what we call success, this what we call prosperity, and this what we call triumph. The reason for your existence is to worship Allah, in the same way as the reason for the student's existence in that country is to seek a PhD. When goals are clear, means get clear too, and I am sorry to say that 97 percent of the youth in the developing countries have no goals and thus lead their lives according to materialistic motivations, temptations, or merely act on impulse.


"मुसलमान फरिश्तों (अरबी में मलाइका) के अस्तित्व को मानते हैं। उनके अनुसार फरिश्ते स्वयं कोई इच्छाश्क्ति नहीं रखते और केवल ईश्वर की आज्ञा का पालन ही करते हैं। वह खालिस रोशनी से बनीं हूई अमूर्त और निर्दोष हस्तियों हैं जो कि न मर्द हैं न औरत बल्कि इंसान से हर लिहाज़ से अलग हैं। हालांकि अगणनीय फरिश्ते है पर चार फरिश्ते कुरान में प्रभाव रखते हैं:

जिब्राईल (Gabriel) जो नबीयों और रसूलों को इश्वर का संदेशा ला कर देता है। इज़्राईल (Azrael) जो इश्वर के समादेश से मौत का फ़रिश्ता जो इन्सान की आत्मा ले जाता है। मीकाईल (Michael) जो इश्वर के समादेश पर मौसम बदलनेवाला फ़रिश्ता। इस्राफ़ील (Raphael) जो इश्वर के समादेश पर कयामत के दिन की शुरूवात पर एक आवाज़ देगा"



इस्लाम के मुताबिक कोई इन्सान तब तक सच्चा मुसलमान नहीं हो सकता जब तक कि वह पांच कर्मों को पूरा ना करे।

इन पांचों में ये शामिल हैं :-


1। वह इस बात को माने कि अल्लाह के अलावा कोई अन्य पूज्य नहीं है और मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अल्लाह के संदेशवाहक हैं।


2। नमाज़ कायम करे।


3। अनिवार्य धर्म-दान (ज़कात) दे।


4। रमज़ान के महीने का रोज़ा रखे।


5। काबा का हज्ज करे, यदि वह वहां तक पहुंचने में समर्थ हो।"


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